Wednesday, February 21, 2024
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बाइलेटरल PCOD का अर्थ हिंदी में (Bilateral PCOD meaning in Hindi)

Bilateral PCOD या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या है। बाइलेटरल PCOD में महिला के दोनों अंडाशय इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। यदि आपको भी अपने PCOD के बारे में जानकारी चाहिए या इसके लक्षण, कारण, उपचार विकल्पों के बारे में जानना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए है। इसमें Bilateral PCOD से संबंधित सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है।

Bilateral PCOD क्या होता है?

Bilateral PCOD meaning in Hindi
Ref: profscbiswas.

PCOD या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं की प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्या है। इसमें अंडाशयों में छोटे-छोटे फोलीकल या चकते बन जाते हैं जिससे हार्मोनल असंतुलन हो जाता है। बाइलेटरल PCOD में महिला के दोनों अंडाशय इस बीमारी से प्रभावित होते हैं।

PCOD होने के कारण महिलाओं को मासिक धर्म की अनियमितता, अतिरिक्त शारीरिक बालों की समस्या, त्वचा पर मुंहासे, वजन बढ़ना और गर्भधारण करने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

Bilateral PCOD के लक्षण

यदि आपमें निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं तो संभव है कि आपको बाइलेटरल PCOD की समस्या है:

  • मासिक धर्म की अनियमितता या देरी
  • अतिरिक्त शारीरिक बाल जैसे कि चेहरे पर मूंछें
  • त्वचा पर तेलीयता, मुंहासे और दाग-धब्बे
  • तेजी से वजन बढ़ना और मोटापा
  • गर्भावस्था में कठिनाई
  • थकान महसूस करना
  • मूड बदलाव और चिंता

इनमें से कुछ भी लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Bilateral PCOD के कारण

बाइलेटरल PCOD होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे:

  • इंसुलिन प्रतिरोध – शरीर में इंसुलिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है।
  • एंड्रोजन हार्मोन का असंतुलन – पुरुष हार्मोन एंड्रोजन का उत्पादन अधिक हो जाता है।
  • जेनेटिक्स – कुछ महिलाओं में यह समस्या वंशानुगत होती है।
  • ओवुलेशन में समस्या – अंडोत्सर्ग प्रक्रिया में व्यवधान।
  • मोटापा – अधिक वजन भी PCOS का कारण बन सकता है।
  • तनाव – अत्यधिक तनाव भी PCOS के लक्षणों को बढ़ा सकता है।

Bilateral PCOD के लिए जांचें

बाइलेटरल PCOD की पुष्टि के लिए निम्न परीक्षण किए जा सकते हैं:

  • रक्त परीक्षण – इंसुलिन, एंड्रोजन और अन्य हार्मोन्स के स्तर की जांच।
  • अल्ट्रासाउंड – अंडाशयों में फोलीकल्स की संख्या और आकार की जांच।
  • मूत्र परीक्षण – पीसीओडी के लक्षणों की पुष्टि।
  • एमआरआई स्कैन – अंडाशयों के आंतरिक चित्र लेने के लिए।
  • वजन, रक्तचाप और BMI जांच करना भी महत्वपूर्ण है।

इन टेस्ट से पीसीओडी की पुष्टि होती है और उपचार के लिए आगे की रणनीति तैयार की जा सकती है।

Bilateral PCOD का उपचार

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बाइलेटरल PCOD के इलाज के लिए निम्न विकल्प उपलब्ध हैं:

  1. दवाएं – एंटी-एंड्रोजन दवाएं जैसे स्पाइरोनोलैक्टोन लेने की सलाह दी जाती है। मेटफॉर्मिन जैसी दवाएं भी प्रेस्क्राइब की जाती हैं।
  2. जीवनशैली में बदलाव – व्यायाम, योग, तनाव कम करना और स्वस्थ आहार बहुत मददगार है।
  3. वज़न कम करना – 5-10% वजन कम करने से PCOS लक्षणों में सुधार देखा गया है।
  4. पूरक उपचार – एक्यूपंचर, होमियोपैथी जैसे पूरक उपचार भी लाभदायक हो सकते हैं।
  5. शल्य चिकित्सा – अंतिम विकल्प के रूप में अंडाशय में दवा इंजेक्शन या शल्यक्रिया की जा सकती है।

Bilateral PCOD से बचाव

बाइलेटरल PCOD से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

  • स्वस्थ वज़न बनाए रखें, मोटापे से बचें
  • धूम्रपान और शराब से परहेज़ करें
  • तनाव और चिंता से बचने का प्रयास करें
  • एंड्रोजन हार्मोन्स से भरपूर खाद्य पदार्थों को कम करें
  • नियमित रूप से व्यायाम और योग करें
  • संतुलित आहार लें, ताजे फलों और सब्जियों का सेवन करें

Bilateral PCOD के साथ जीवनयापन

बाइलेटरल PCOD के साथ भी एक स्वस्थ और सामान्य जीवन जीया जा सकता है। कुछ बातें जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए:

  • नियमित चिकित्सीय परामर्श लें और दवाओं का सेवन करें
  • प्रतिदिन 30 मिनट की व्यायाम करें
  • तनाव और चिंता से बचने के लिए योग और ध्यान करें
  • 8 घंटे की नींद लेने का प्रयास करें
  • सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें और खुश रहने की कोशिश करें
  • परिवार और दोस्तों का सहयोग लें
  • स्वस्थ और संतुलित भोजन करें, वज़न पर नियंत्रण रखें

इन बातों का ध्यान रखकर Bilateral PCOD के साथ भी एक सामान्य लाइफ जी सकती हैं।

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