Thursday, February 29, 2024
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Miscarriage Meaning in Hindi/ गर्भपात का हिंदी में अर्थ

गर्भपात एक ऐसा प्रकार है जिसमें गर्भवती महिला के गर्भ से बच्चा गर्भपात हो जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कि आनुवंशिक समस्या, हार्मोनल विविधता, या फिर कोई संक्रमण।

गर्भपात (Miscarriage) का अर्थ है गर्भावस्था के दौरान गर्भ का अचानक खत्म हो जाना। इसे हिंदी में इस तरह से कहा जाता है:

  • गर्भपात
  • गर्भस्खलन
  • गर्भविसर्जन
  • गर्भविसंपत्ति

गर्भपात होने पर महिलाओं को रक्तस्राव, पेट में दर्द और क्रैम्प जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि गर्भपात हो जाता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्भपात के बाद शारीरिक और मानसिक रूप से काफी तनाव महसूस किया जा सकता है। डॉक्टर की देखरेख में आराम और धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियाँ शुरू करने से इस दुखद अनुभव से उबरने में मदद मिल सकती है।

Miscarriage के कारण

गर्भपात आमतौर पर गर्भावस्था के पहले 20 हफ्तों के दौरान होता है। यह एक आम समस्या है और कई कारणों से हो सकता है जैसे कि:

Miscarriage के कारण
Ref: birlafertility
  • आनुवंशिक समस्याएं: गर्भपात का सबसे आम कारण आनुवंशिक समस्याएं हैं। इन समस्याओं में भ्रूण में गुणसूत्र या जीन में दोष शामिल हो सकते हैं।
  • हार्मोनल असंतुलन: हार्मोनल असंतुलन भी गर्भपात का कारण बन सकता है। इनमें थायरॉइड समस्याएं, एड्रेनल समस्याएं, या प्रोजेस्टेरोन की कमी शामिल हो सकती है।
  • गर्भाशय की समस्याएं: गर्भाशय की समस्याएं, जैसे कि फाइब्रॉएड्स या गर्भाशय के आकार में असामान्यताओं, भी गर्भपात का कारण बन सकती हैं।
  • संक्रमण: कुछ संक्रमण, जैसे कि रूबेला, CMV, या हर्पीज़, गर्भपात का कारण बन सकते हैं।
  • माँ की स्वास्थ्य समस्याएं: कुछ माँ की स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, या ऑटोइम्यून विकार, गर्भपात का कारण बन सकती हैं।
  • जीवनशैली कारक: कुछ जीवनशैली कारक, जैसे कि धूम्रपान, शराब का सेवन, या नशीली दवाओं का उपयोग, गर्भपात का कारण बन सकते हैं।

गर्भपात के जोखिम कारकों में शामिल हैं:

  • उम्र: गर्भवती महिला की उम्र 35 वर्ष से अधिक होने पर गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
  • पूर्व गर्भपात का इतिहास: जिन महिलाओं का पहले गर्भपात हुआ है, उनमें बाद में गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है।
  • पारिवारिक इतिहास: जिन महिलाओं के परिवार में गर्भपात का इतिहास है, उनमें भी गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है।
  • कुछ स्वास्थ्य समस्याएं: कुछ स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, या ऑटोइम्यून विकार, गर्भपात का खतरा बढ़ा सकती हैं।
  • कुछ जीवनशैली कारक: कुछ जीवनशैली कारक, जैसे कि धूम्रपान, शराब का सेवन, या नशीली दवाओं का उपयोग, गर्भपात का खतरा बढ़ा सकते हैं।

यदि आपको गर्भपात के कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। डॉक्टर आपके लक्षणों का मूल्यांकन करेंगे और गर्भपात के कारण का पता लगाने के लिए परीक्षण कर सकते हैं।

गर्भपात के प्रकार (Types of Miscarriage in Hindi)

गर्भपात के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें उनके लक्षण और प्रगति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

पूर्ण गर्भपात (Complete Miscarriage): इस प्रकार के गर्भपात में, गर्भाशय से भ्रूण और प्लेसेंटा पूरी तरह से बाहर निकल जाता है। पूर्ण गर्भपात के लक्षण में भारी रक्तस्राव, पेट में ऐंठन, और योनि से ऊतकों का निकलना शामिल हो सकते हैं।

अधूरा गर्भपात (Incomplete Miscarriage): इस प्रकार के गर्भपात में, भ्रूण या प्लेसेंटा का कुछ हिस्सा गर्भाशय में रह जाता है। अधूरे गर्भपात के लक्षण में भारी रक्तस्राव, पेट में ऐंठन, और योनि से ऊतकों का निकलना शामिल हो सकते हैं।

प्रत्याशित गर्भपात (Threatened Miscarriage): इस प्रकार के गर्भपात में, गर्भपात होने का खतरा होता है, लेकिन गर्भपात अभी तक शुरू नहीं हुआ है। प्रत्याशित गर्भपात के लक्षण में पेट में ऐंठन, और योनि से हल्का रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं।

अपरिहार्य गर्भपात (Inevitable Miscarriage): इस प्रकार के गर्भपात में, गर्भाशय ग्रीवा खुलने लगती है और गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है। अपरिहार्य गर्भपात के लक्षण में पेट में ऐंठन, और भारी रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं।

सेप्टिक गर्भपात (Septic Miscarriage): इस प्रकार के गर्भपात में, गर्भाशय में संक्रमण हो जाता है। सेप्टिक गर्भपात एक गंभीर स्थिति है जो जीवन के लिए खतरा हो सकती है। सेप्टिक गर्भपात के लक्षण में भारी रक्तस्राव, पेट में तेज दर्द, और बुखार शामिल हो सकते हैं।

गर्भपात के प्रकार का निदान डॉक्टर शारीरिक परीक्षण, अल्ट्रासाउंड, या रक्त परीक्षण के आधार पर कर सकते हैं।

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गर्भपात की पहचान (Miscarriage ki Pehchan)

गर्भपात के कई लक्षण हो सकते हैं, जो गर्भपात के प्रकार और गर्भावस्था की अवस्था के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। गर्भपात के कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • रक्तस्राव: गर्भपात के सबसे आम लक्षण रक्तस्राव है। रक्तस्राव हल्का या भारी हो सकता है, और यह अक्सर पेट में ऐंठन के साथ होता है।
  • पेट में ऐंठन: पेट में ऐंठन भी गर्भपात का एक आम लक्षण है। ऐंठन अक्सर रक्तस्राव के साथ होती है, और यह कभी-कभी तेज या ऐंठन वाली हो सकती है।
  • पीठ दर्द: पीठ दर्द भी गर्भपात का एक सामान्य लक्षण हो सकता है। पीठ दर्द अक्सर पेट में ऐंठन के साथ होता है, और यह कभी-कभी निचले या मध्य पीठ में होता है।
  • गर्भाशय ग्रीवा का खुलना: गर्भाशय ग्रीवा का खुलना गर्भपात का एक संकेत हो सकता है। गर्भाशय ग्रीवा एक मांसपेशी है जो गर्भाशय को योनि से जोड़ती है। यदि गर्भाशय ग्रीवा खुलने लगती है, तो यह गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भाशय से ऊतकों का निकलना: गर्भाशय से ऊतकों का निकलना भी गर्भपात का एक संकेत हो सकता है। ये ऊतक भ्रूण, प्लेसेंटा, या अन्य गर्भाशय के ऊतक हो सकते हैं।

यदि आपको गर्भपात के कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है। डॉक्टर आपके लक्षणों का मूल्यांकन करेंगे और गर्भपात के कारण का पता लगाने के लिए परीक्षण कर सकते हैं।

गर्भपात के निदान के लिए डॉक्टर निम्नलिखित परीक्षण कर सकते हैं:

  • शारीरिक परीक्षण: डॉक्टर आपके पेट और योनि की जांच कर सकते हैं।
  • अल्ट्रासाउंड: अल्ट्रासाउंड एक अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग करके गर्भाशय और भ्रूण की छवियां बनाने की प्रक्रिया है। अल्ट्रासाउंड डॉक्टर को भ्रूण के विकास की स्थिति की जांच करने में मदद कर सकता है।
  • रक्त परीक्षण: रक्त परीक्षण डॉक्टर को गर्भपात के कारण का पता लगाने में मदद कर सकते हैं।

गर्भपात के बाद, डॉक्टर आपको रक्तस्राव और संक्रमण के लिए निगरानी के लिए नियमित रूप से आने के लिए कह सकते हैं।

गर्भपात का प्रभाव (Nacharithal ke Prabhav)

गर्भपात का महिला की शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह से प्रभाव पड़ सकता है।

शारीरिक प्रभाव

गर्भपात के बाद महिलाओं में निम्नलिखित शारीरिक प्रभाव हो सकते हैं:

  • रक्तस्राव: गर्भपात के बाद रक्तस्राव आम है। यह रक्तस्राव हल्का या भारी हो सकता है, और यह आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों तक रह सकता है।
  • पेट में ऐंठन: गर्भपात के बाद पेट में ऐंठन भी आम है। यह ऐंठन अक्सर रक्तस्राव के साथ होती है, और यह कभी-कभी तेज या ऐंठन वाली हो सकती है।
  • पीठ दर्द: गर्भपात के बाद पीठ दर्द भी आम हो सकता है। यह पीठ दर्द अक्सर पेट में ऐंठन के साथ होता है, और यह कभी-कभी निचले या मध्य पीठ में होता है।
  • इंफेक्शन: गर्भपात के बाद संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपको गर्भपात के बाद भारी रक्तस्राव, पेट में दर्द, या बुखार होता है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।

भावनात्मक प्रभाव

गर्भपात के बाद महिलाओं में निम्नलिखित भावनात्मक प्रभाव हो सकते हैं:

  • शोक: गर्भपात एक नुकसान है, और यह महिलाओं में शोक का कारण बन सकता है। शोक के लक्षण में उदासी, गुस्सा, चिंता, और अकेलापन शामिल हो सकते हैं।
  • अपराध बोध: कुछ महिलाएं गर्भपात के लिए खुद को दोषी महसूस कर सकती हैं। यह अपराध बोध उनके धार्मिक विश्वासों, या उनके द्वारा गर्भपात के निर्णय के कारण हो सकता है।
  • चिंता: गर्भपात के बाद महिलाओं को भविष्य के गर्भधारण और प्रसव के बारे में चिंता हो सकती है।

गर्भपात का प्रभाव महिलाओं पर अलग-अलग तरह से पड़ता है। कुछ महिलाएं जल्दी से ठीक हो जाती हैं, जबकि अन्य को समय और समर्थन की आवश्यकता हो सकती है।

यदि आपको गर्भपात के बाद भावनात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो अपने डॉक्टर या किसी अन्य विश्वसनीय व्यक्ति से बात करें।

गर्भपात के बाद क्या करें (Miscarriage ke Baad Kya Karein)

गर्भपात के बाद स्व-देखभाल (Self Care after Miscarriage in Hindi)

  • कुछ महिलाएं आराम करना पसंद करती हैं, विशेष रूप से अगर वे थकी हुई महसूस कर रही हों।
  • गर्भपात के बाद कुछ समय तक हल्का योनि रक्तस्राव (हल्का मासिक धर्म जैसा रक्तस्राव या धब्बेदार) सामान्य है।
  • गर्भपात के बाद कुछ दर्द सामान्य है क्योंकि गर्भाशय सिकुड़ रहा होता है। हल्के दर्दनाशक दवाई से ऐंठन जैसे दर्द में राहत मिल सकती है। अगर दर्द बढ़ता है तो महिला को सहायता लेनी चाहिए।
  • हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलें। पैड को साफ़ करें या सुरक्षित तरीके से निपटान करें। योनि क्षेत्र को धोएं।
  • रक्तस्राव रुकने तक कोई भी यौन संबंध न बनाएँ या योनि में कुछ न डालें।
  • यदि STI या HIV से संक्रमण का खतरा है तो हर यौन संबंध में कंडोम का प्रयोग करें।
  • स्वास्थ्य कर्मी द्वारा बताए गए अनुसार चिकित्सक से फिर से संपर्क करें।

परिवार नियोजन

  • महिला यौन संबंध बनाते ही गर्भवती हो सकती है। अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए परिवार नियोजन की कोई विधि अपनाएँ और STI/HIV/AIDS से संक्रमण से बचने के लिए कंडोम का प्रयोग करें।
  • अगर गर्भपात से कोई जटिलता नहीं है, तो तुरंत ही लगभग किसी भी गर्भनिरोधक विधि का प्रयोग शुरू किया जा सकता है।
  • परिवार नियोजन की विधि के बारे में स्वास्थ्य कर्मी से बात करें जो आपकी और आपके साथी की ज़रूरतों को सबसे अच्छी तरह पूरा कर सके।
  • आकस्मिक या कृत्रिम गर्भपात के बाद, अगले गर्भावस्था तक कम से कम छह महीने का अंतराल माँ और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सुझाया जाता है।

ख़तरे के संकेत

यदि इनमें से कोई लक्षण हों तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाना चाहिए, दिन में या रात में। प्रतीक्षा न करें:

  • बढ़ा हुआ रक्तस्राव या 2 दिनों तक लगातार रक्तस्राव
  • बुखार, बीमार महसूस करना
  • चक्कर आना या बेहोशी
  • पेट दर्द
  • कमर दर्द
  • उल्टी या मतली
  • दुर्गन्धयुक्त योनि व्रव

इन बिंदुओं के अलावा, महिलाओं को यौन संबंध फिर से शुरू करने से संबंधित मुद्दों पर आपसे चर्चा करने की आवश्यकता हो सकती है। कुछ महिलाओं को उसके बाद कुछ समय तक यौन संबंध बनाना नहीं चाहिए। यह भावना तब भी जारी रह सकती है जब वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो चुकी हो।

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गर्भपात को रोकने के प्राकृतिक तरीके (Miscarriage Prevention ke Upay)

गर्भपात को रोकने के लिए कोई सिद्ध प्राकृतिक तरीका नहीं है। हालांकि, कुछ चीजें हैं जो आप कर सकती हैं जो गर्भपात के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • स्वस्थ आहार खाना: एक स्वस्थ आहार खाने से आपके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, जो गर्भपात के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • पर्याप्त नींद लेना: पर्याप्त नींद लेना आपके शरीर को ठीक होने और स्वस्थ रहने में मदद कर सकती है।
  • नियमित रूप से व्यायाम करना: नियमित रूप से व्यायाम करना आपके रक्त प्रवाह में सुधार कर सकता है और आपके गर्भाशय को स्वस्थ रख सकता है।
  • तनाव कम करना: तनाव गर्भपात के जोखिम को बढ़ा सकता है। तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान, या अन्य आराम तकनीकों का प्रयास करें।

कुछ अन्य प्राकृतिक तरीके हैं जिनकी कुछ महिलाओं ने गर्भपात को रोकने में मदद करने के लिए रिपोर्ट की है, लेकिन इनके लिए वैज्ञानिक प्रमाण कम हैं। इनमें शामिल हैं:

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड की खुराक लेना: ओमेगा-3 फैटी एसिड गर्भाशय के स्वास्थ्य में सुधार करने और गर्भपात के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • प्रयोगशाला में तैयार फोलिक एसिड की खुराक लेना: फोलिक एसिड भ्रूण के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, और यह गर्भपात के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
  • अश्वगंधा का उपयोग करना: अश्वगंधा एक जड़ी बूटी है जो तनाव को कम करने और गर्भाशय के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकती है।

यदि आप गर्भपात के जोखिम को कम करना चाहती हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करना सबसे अच्छा है। वे आपको सबसे अच्छा तरीका चुनने में मदद कर सकते हैं।

गर्भपात के बारे में सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न/ Miscarriage ke Faq

गर्भपात क्या है?

गर्भपात गर्भावस्था का असामयिक अंत है, आमतौर पर गर्भावस्था के 20 सप्ताह से पहले होता है।

गर्भपात के क्या कारण हैं?

गर्भपात के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ में शामिल हैं:
1. भ्रूण संबंधी असामान्यताएं
2. स्वास्थ्य की स्थिति
3. जीवनशैली के कारक
4. अज्ञात कारण

गर्भपात के लक्षण क्या हैं?

गर्भपात के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
1. योनि से रक्तस्राव
2. ऐंठन
3. ऊतक का गुजरना
4. गर्भावस्था के लक्षणों का कम होना

गर्भपात का निदान कैसे किया जाता है?

गर्भपात का निदान आमतौर पर शारीरिक परीक्षा, रक्त परीक्षण और अल्ट्रासाउंड के संयोजन से किया जाता है।

गर्भपात का इलाज कैसे किया जाता है?

गर्भपात के उपचार के विकल्प इस बात पर निर्भर करते हैं कि गर्भपात कितना दूर तक चला गया है और महिला की व्यक्तिगत स्थिति क्या है। उपचारों में शामिल हो सकते हैं:
1. प्रतीक्षा करना (यदि गर्भपात अधूरा है या स्वाभाविक रूप से पूरा होने की संभावना है)
2. दवा (गर्भपात को पूरा करने में मदद करने के लिए)
3. शल्य प्रक्रिया (गर्भपात को पूरा करने के लिए)

यह महत्वपूर्ण है कि गर्भपात का अनुभव करने वाली महिलाओं को भावनात्मक समर्थन मिले। यदि आप गर्भपात से जूझ रही हैं, तो कृपया सहायता के लिए किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से संपर्क करें।

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