Wednesday, February 21, 2024
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MONKEYPOX VIRUS

MONKEYPOX VIRUS

MONKEYPOX VIRUS क्या आपके चारों तरफ भी monkeypox का शोर फैला हुआ है और क्या आप इस virus के बारे में जानते है ? अगर शोर फैला हुआ है तो आपको इसके बारे में विस्तृत जानकारी होना बेहद जरुरी है। आज इस Article में हम monkeypox वायरस के लक्षण और इससे खुद को प्रोटेक्ट करने वाले टिप्स के बारे में बताएंगे इसलिये Article के साथ अंत तक जुड़े रहिये।

जहाँ एक ओर कोरोना का डर लोगो के मन से निकल नहीं पाया था वहीँ दूसरी ओर monkeypox virus ने दुनिया भर में खौफ का माहोल बनाया हुआ है। भारत में अभी तक इसके 6 केसेस देखने को मिल चुके है एवं एक की मृत्यु भी हो चुकी है। और विश्व में 3500 से अधिक active केसेस है जिसमे ज्यादातर केसेस यूरोप और अमेरिका में पाए गए है। 


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Monkeypox, virus के कारण होने वाली एक दुर्लभ बीमारी है जो जानवरों से इंसानो में फैलती है। इस condition में त्वचा पर बड़े बड़े दाने या घाव बन जाते है जो सामान्य और गंभीर दोनों हो सकते है। कुछ मामलों में monkeypox खुद ठीक हो जाता है जबकि कुछ मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है। यह small pox से कम गंभीर है।

Monkeypox के लक्षण लगभग smallpox के सामान होते है। जब कोई व्यक्ति इसके संपर्क में आता है तो उसमे 5 से 21 दिन में लक्षण दिखना शुरू होते है। कुछ लोगो में 7 से 14 दिन का समय भी लग सकता है। इसके शुरुआत लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमरदर्द, थकन, कमजोरी, ठण्ड लगना, lymph nodes में सूजन देखने को मिलते है।  

Lymph nodes में सूजन इसका गंभीर और विशेष लक्षण है जो इसको खतरनाक बनाता है। lymph nodes आपके गले में दोनों ओर भी होते है जो शरीर में infection होने पर उसका असर कम करने का प्रयास करते है।

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अब इसके लक्षणों के बारे में detail में बात करें तो monkeypox वायरस के संपर्क में आने के बाद सबसे पहले बुखार होता है। बुखार के 1 से 3 दिन के बाद त्वचा पर दाने नज़र आने लगते है। वैसे तो ये दाने शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते है लेकिन चेहरे, हथेलियां, तलवे, आँख, मुँह, जननांग आदि ज्यादा प्रभावित होते है। वैसे तो यह दाने 2 से 3 हफ़्तों में खुद ही ठीक हो जाते है। कभी कभी इसमें ज्यादा समय लग सकता है।

जब तक यह लक्षण रोगी में रहते है। तब तक संक्रमित व्यक्ति इसको दूसरों में फैला सकता है। अतः अन्य वायरस जनित रोगों की तरह ही यह छूने, यौन सम्बन्ध, म्यूकस, खांसी आदि के द्वारा फ़ैल सकता है।  

अब इसके ट्रीटमेंट की बात की जाये तो मंकीपॉक्स एक ऐसा वायरल इंफेक्शन है, जो आमतौर पर बिना इलाज के अपने आप ही ठीक हो जाता है। हालांकि, इसके कारण त्वचा पर बनने वाले चकत्तों की पूरी तरह से देखभाल करना बेहद जरूरी है। संभव हो तो त्वचा के चकत्तों व घावों को ढक कर रखें।

मुंह या आंख पर बने किसी भी घाव या छाले को छूएं नहीं और ऐसे स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेकर माउथवॉश और आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें। 

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मंकीपॉक्स के प्रति रोकथाम के लिए स्मॉलपॉक्स की कुछ वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमे एमवीएन-बीएन शामिल हैं। हालांकि, अभी यह वैक्सीन व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है और विश्व स्वास्थ्य संगठन वैक्सीन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर इस पर काम कर रहा है। 

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भारत में केंद्र सरकार की guideline के अनुसार monkeypox होने पर 21 दिन का आइसोलेशन, घावों को ढककर रखना एवं ट्रिपल लेयर मास्क पहनना शामिल है। और केंद्र सरकार जल्द ही इसकी testing kit और vaccine लाने पर भी काम कर रही है। 

मंकीपॉक्स वायरस को आमतौर पर ज्यादा संक्रामक नहीं माना जाता है, क्योंकि यह सिर्फ संक्रमित त्वचा के संपर्क में आने से ही होता है। इसलिए पब्लिक में यह संक्रमण फैलने का खतरा काफी कम है। लेकिन फिर भी अपना और अपने परिवार का ध्यान रखिये। और इससे बचने की हर संभव कोशिश कीजिये। मंकीपॉक्स के प्रति जागरूकता फैलाना भी इस रोग को फैलने से रोकने में मदद कर सकता है।

स्वास्थ्य से जुडी नयी नयी जानकारी के लिए KAPEEFIT के साथ जुड़े रहिये।

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