Monday, February 26, 2024
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Panchkarma the Most Precious Gift of Ayurveda

Panchkarma the Most Precious Gift of Ayurveda

Panchkarma the Most Precious Gift of Ayurveda पंचकर्म जैसा की नाम से  पता चलता है , पांच कर्म यानी पांच techniques या पांच therapies जिनके द्वारा शरीर के अंदर जमा सभी विषैले पदार्थ या टॉक्सिन्स जो हमारे शरीर में जमा हो जाते है उनको जड़ समेत बाहर निकालना।आयुर्वेद का सबसे अनमोल तोहफा पंचकर्म
नमस्कार मै राकेश सिंघल आज हम आयुर्वेद की इस  बहुत कारगर और प्राचीन चिकित्सा पद्धति पंचकर्म के बारे मे और हमारे शरीर को उससे मिलने वाले अद्भुत लाभों को जानेंगे। इसलिए इनका पूरा फायदा लेने के लिए इस आर्टिकल को धयान से अंत तक जरूर पढ़ें।

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आयुर्वेदिक चिकित्सा/ Ayurvedic Treatment

आयुर्वेद कहता है कि मनुष्य का शरीर 5 तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु से बना हैऔर इन्ही तत्वों से ब्रह्मांड भी बना है। जब शरीर में इन 5 तत्वों के अनुपात में कुछ गड़बड़ होती है तो दोष यानी समस्याएं पैदा होती हैं , और यही दोष हमारे शरीर में होने वाली सभी बिमारियों का कारण बनते है। 

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आयुर्वेद इन तत्वों को फिर से सामान्य स्थिति में लाता है और उन्हें ठीक करता है .

इसके लिए आयुर्वेद में दो प्रकार की चिकित्सा की जाती है 

  • पहली शमन जिसमे बीमारी को दवाइयों के माध्यम से ठीक किया जाता है।  
  • दूसरी शोधन जिसमे बीमारी को जड़ से दूर करने के लिए चिकित्सा की जाती है। इसी शोधन यानी ELIMINATION की विधि को ही आयुर्वेद में पंचकर्म कहा जाता है।

पंचकर्म क्या है ?/ Panchakarma Definition

पंचकर्म, आयुर्वेद शास्त्र में वर्णित एक विशेष चिकित्सा पद्धति है, जो दोषों को शरीर से बाहर निकाल कर रोगों को जड़ से समाप्त करती है! यह शरीर शोधन की प्रक्रिया है, जो स्वस्थ मनुष्य के लिए भी फायदेमंद है। पंचकर्म , शरीर को detoxify करके immune system को मजबूत करने का सबसे अच्छा माध्यम है। पंचकर्म के द्वारा शरीर के साथ-साथ मन का भी उपचार किया जाता है।

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बीमार अथवा हर स्वस्थ व्यक्ति को भी इंसान को वर्ष में एक या दो बार अपनी गाडी की तरह अपने शरीर की भी सर्विसिंग के लिए पंचकर्म जरूर करवाना चाहिए। पंचकर्म करवाने से शरीर में मौजूद toxins बाहर निकल जाते हैं जिससे बीमारी होने की संभावनाएं बहुत ही कम हो जाती है। यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो वह बहुत ही जल्दी स्वस्थ हो जाता है।गठिया, लकवा, पेट से जुड़े रोग, साइनस, माइग्रेन, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, साइटिका, बीपी, डायबीटीज, लिवर संबंधी विकार, जोड़ों का दर्द, आंख और आंत की बीमारियों आदि के लिए पंचकर्म किया जाता है।

पंचकर्म के मुख्य कर्म/ Process of Panchkarma

पंचकर्म मुख्यतः 3 चरणों में होने वाला process है  जिन्हे हम पूर्वकर्म , प्रधानकर्म , पश्चात्कर्म कहते है. इस चिकित्सा से पूर्व जिन कर्मों को किया जाता है उन्हें पूर्व कर्म कहा जाता है। और बाद में जिन कर्मों को किया जाता है उन्हें पश्चात् कर्म कहा जाता है।

पंचकर्म के प्रधान कर्म में मुख्य रूप से 5 प्रकार की चिकित्सा दी जाती है   

  • वमन     
  • विरेचन
  • वस्ति चिकित्सा
  • नस्य चिकित्सा
  • रक्तमोक्षण 

इन 5 procedure को पंचकर्म में प्रधानकर्म कहते है।

पंचकर्म से पहले के चरण

पंचकर्म से पहले के चरण यानी पूर्वकर्म , पंचकर्म की प्रारंभिक प्रक्रिया होती है जो पेट में मौजूद toxins को त्यागने में मदद करती है और रोगी की रोग – प्रतिरोधक क्षमता  में मजबूती लाती है। 

इसमें ये 3 प्रकिर्याएँ होती है 

दीपन-पाचन:- 

Digestive System को दुरुस्त रखने के लिए पेट के विकार को दूर करना बहुत ही आवश्यक होता है। दीपन-पाचन कर्म में कुछ ऐसी औषधियों का सेवन करवाया जाता है जिससे मावन शरीर का पाचन तंत्र मजबूत बनें।

 स्नेहन:- 

इस कर्म के अंतर्गत शरीर में तेलों की मसाज के द्वारा रोग को ठीक किया जाता है। यह मसाज तेल, घी, वसा एवं मज्जा के द्वारा की जाती है।

स्वेदनम:-

स्वेदनम में शरीर से पसीना निकाला जाता है । इस कर्म  में कुछ औषधियों के प्रयोग से शरीर में जमा टॉक्सिन्स पसीने के रुप में बाहर निकाले जाते हैं जिससे शरीर का डेटोक्सिफिकेशन हो जाता है!

पंचकर्म पद्धति के पांच प्रकार

इसी प्रकार पंचकर्म के प्रधान कर्म में 5 प्रकार की TECHNIQUES होती है। आयुर्वेद के अनुसार समस्त कफ दोषों का निवारण वमन कर्म के द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में शरीर में जमे विशैले toxins को आयुर्वेदिक औषधियों के माध्यम से बाहर निकाला जाता है।शरीर में पित्त की अधिकता होने पर उसे विरेचन कर्म के द्वारा संतुलित किया जाता है। इस कर्म से पेट में जमा toxins  को शरीर से बाहर  निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में मुख्यतः आयुर्वेदिक दवाएं एवं काढ़ो का प्रयोग किया जाता है।

कफ दोष का निवारण नस्‍य कर्म से किया जाता है। इस कर्म में औषधियों का प्रवेश नाक के द्वारा कराया जाता है। इसमें रोगी के सिर में जमा toxins नाक के द्वारा बाहर निकले जाते हैं। इसके बाद रोगी के सिर एवं कंधों पर हल्की-हल्की मालिश भी की जाती है।

चौथा इस कर्म के माध्यम से बहुत जटिल बीमारी को ठीक करने में मदद मिलती है। यह चिकित्सा वात दोष के लिए बहुत उपयोगी है। वस्ति कर्म में तेल, घी ,दूध एवं अन्य आयुर्वेदिक तत्व प्रयोग किये जाते है। इस कर्म में  शरीर से toxins को निकलने के लिए तरल प्रदार्थ जैसे घी , तेल , दूध आदि को ANIMA के द्वारा मलाशय तक पहुंचाया जाता है।पांचवा यह कर्म खराब खून से होने वाली बिमारियों को दूर करने में बहुत उपयोगी होता है। रक्तमोक्षण में शिराओं को काटकर या  लीच चिपका कर अशुद्ध रक्त बाहर निकालने की कोशिश की जाती है।

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पंचकर्म चिकित्सा के लाभ

पंचकर्म चिकित्सा के लाभ अद्भुत लाभ होते है। 

पंचकर्म से शरीर पुष्ट व बलवान होता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

शरीर की क्रियाओं का संतुलन पुन: लौट आता है एवं रक्त 

शुद्धि से त्वचा कांतिमय होती है।

पंचकर्म चिकित्सा से इंद्रियों और मन को शांति मिलती है।

इस चिकित्सा पद्ति से दीर्घायु प्राप्त होती है और बुढ़ापा देर से आता है!

यह रक्त संचार तो बढ़ाता ही है। साथ ही मानसिक तनाव में भी कारगर है।

अतिरिक्त चर्बी को हटाकर वजन कम करने मे भी पंचकर्म अहम् भूमिका निभाता है।

इस से स्मरण शक्ति मे चमत्कारिक रूप से बढ़ोतरी होती है।

स्वास्थ्य से जुडी नयी नयी जानकारी के लिए KAPEEFIT के साथ जुड़े रहिये।

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