Wednesday, May 29, 2024
spot_img
HomeDiseases and TreatmentStammering in Hindi 

Stammering in Hindi 

Stammering in Hindi | स्टम्मेरिंग या फिर हकलाना , कॉमन मैन में पाई जाने वाली , एक कॉमन लेकिन थोड़ी सीरियस प्रॉब्लम है. जिसके कारण , इस प्रॉब्लम को फेस कर रहे इंसान को , बहुत बार पब्लिक में ऐम्बर्रेसमेंट फेस करनी पड़ती है . इवन स्टम्मेरिंग फेस कर रहे इंसान की हालत यहाँ तक हो जाती है , कि उसका  जॉब इंटरव्यूज , रिलेशनशिप्स  और मैरिज प्रोपोज़ल्स में रिजेक्शन फेस करना उसके लिए आम हो जाता है. जिसके कारण ,ओवर दा पेरियड ऑफ़ टाइम ,  उसकी सेल्फ एस्टीम और कॉन्फिडेंस , जीरो पर पहोच जाता है .

अगर आप भी स्टम्मेरिंग की प्रॉब्लम को फेस कर रहे है , तो इस blog में हम बात करेंगे , कि कैसे कुछ आसान उपाय अपना कर , आप हकलाने की समस्या से निजाद पा सकते हैं .

Stammering in Hindi 

Stammering in Hindi 

Cause

Stammering in Hindi | स्टम्मेरिंग या फिर हकलाने की प्रॉब्लम के उपचार जानने से पहले , जानना ज़रूरी है इस प्रॉब्लम की जड़ , जो लाई करती है ह्यूमन बॉडी की अंदर . आसान शब्दों में अगर समझाया जाए , तो हकलाने की समस्या के जो कारण है . वो ब्रॉडली दो मेन काटेगोरी में काटेगोराइज़्ड हैं .

पहला साइकोलॉजिकल और दूसरा  मेडिकल .

पहले बात करते है साइकोलॉजिकल प्रॉब्लमस  की : साइकोलॉजिकल प्रॉब्लमस वो प्रोब्लेम्स हैं , जो हमारी बॉडी में लाई न करके , ब्रेन में  करती हैं . जैसे की लैक ऑफ़ कॉन्फिडेंस  इ. टी . सी . इसके रीसन कुछ भी हो सकते हैं  . जैसे की हमारी अपब्रिंगिंग या हमारी लाइफ का कोई पास्ट इवेंट. इस तरह की प्रॉब्लम का सलूशन , केवल स्पीच प्रैक्टिस से हो सकता है , जिसको हम अकेले में मिरर के सामने कर सकते हैं .

Online Ayurvedic Consultation

Symptoms

Stammering in Hindi | अब बात आती है, मेडिकल कंडीशंस की, जिनके कारण स्टैमरिंग की प्रॉब्लम, किसी इंसान की लाइफ में आती है।

तो पहली कंडीशन है: जीभ का मोटा या पतला होना

Online Ayurvedic Consultation

मोटी या पतली जीभ, वह कारण है जिसकी वजह से, इंसान साफ तरह से कोई शब्द नहीं कह पाता। जिसके कारण, वह या तो कोई बात समझा नहीं पाता, या फिर दूसरों के ऊपर डिपेंडेंट हो जाता है।

इसके अलावा दूसरी कंडीशन है: जौ मसल्स

Online Ayurvedic Consultation

कई बार, इंसान की जीभ ठीक होती है, लेकिन प्रॉब्लम उसके जौ मसल्स में होती है, जिसके कारण उसका जौ मूवमेंट ठीक से नहीं हो पाता। और यह भी कारण है कि इंसान, स्टैमरिंग करने लगता है।

और टंग और जौ मसल्स में अगर कोई प्रॉब्लम नहीं है, तो स्टैमरिंग का तीसरा रीजन होता है स्लो नर्वस रिएक्शन।

Treatment

Stammering in Hindi | खैर यह तो बात हुई स्टैमरिंग के कारण की, अब बात करते हैं स्टैमरिंग के निवारण की।

तो पहला निवारण है : वचा

Online Ayurvedic Consultation

तंत्रिका तंत्र पर इसके प्रभाव के कारण, वचा आयुर्वेद में एक पुनर जीवी जड़ी-बूटी मानी जाती  इसका स्वाद कड़वा होता है, और यह सूखे रूप में उपलब्ध है।

अपने वात संतुलन के कारण, आयुर्वेद में इसकी मदद से, स्पीच डिसऑर्डर्स का भी उपचार किया जाता है।

Stammering in Hindi

वचा के बाद दूसरा उपाय आता है: सोंठ

Online Ayurvedic Consultation

सोंठ का कंजप्शन, ह्यूमन माइंड को stress-free करता है। जिसके कारण से यह देखा गया है, कि स्टैमरिंग में लोगों को आराम मिला है।

इसके अलावा तीसरा उपाय है आमला या फिर आंवला का उपयोग: 

Online Ayurvedic Consultation

आंवला आयरन में तो छोटा है, और साथ ही साथ इसका सेवन, स्पीच ऑर्गन का ब्लड सरकुलेशन इंप्रूव करता है। साथ में इसका सेवन, खाने वाली के लिए, टंग थिनर का काम करता है। जिस स्टैमरिंग प्रॉब्लम में आराम मिलता है।

इनमें से किसी भी उपाय को हम, डॉक्टर की सलाह के बिना करने का सुझाव नहीं देते। इसलिए, इन उपाय को अपनाने से पहले, चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है।

ऐसी ही नयी नयी जानकारी के लिए KAPEEFIT Blog के साथ जुड़े रहे |

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments

Book Online Consultation